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शनिवार, 22 अगस्त 2009

हमने कहीं एक कहानी पढ़ी, सुनना चाहते हैं -एक बार एक जंगल में एक भेड़ ने छोटे से शेर के बच्चे को देखा। वो अपने परिवार से बिछुड़ गया था भेड़ को शावक पर दया आ गई उसकी ममता जागी और उसने उस शावक को पालने की जिम्मेदारी उठा ली ।
धीरे धीरे वो शावक बड़ा होने लगा और जाहिर है एक दिन वो अपनी माता से भी ऊँचा पूरा हो गया । ये तो होना ही था आखिर वो एक शेर था । कभी कभी भेड़ को उससे डर लगता पर फ़िर वो सोचती ये मुझे नुक्सान नही पहुँचा सकता आखिर ये मेरा बेटा है ।
एक दिन जब वो सिंह पुत्र अपनी भेद माता के साथ खेल रहा था तभी पास की एक ऊँची पड़ी से गर्जना सुने दी -सिंह गर्जन मीलों दूर तक के दिलों को दहला देने वाला सिंह गर्जन । शावक ने देखा की उस दहाड़ को सुनते ही सारे जीव और उसकी स्वयं की माता भी भय से कांपने लगे सारे जंगल में अफरा -तफरी मच गई चारों और जीव अपने अपने चेहरों पैर मृत्यु का भय लिए बस भाग रहें हैं ,बस भाग रहें हैं ।पर यदि ये गर्जना इतनी ही भयंकर थी तो उस किशोर सिंह को उसने डराया क्यों नहीं ? क्यों उसे ऐसा लगा जैसे ये आवाज़ उसकी जानी पहचानी है जैसे शायद ये उसी की हगे उसने उसी पल आँखे बंद कर दो क्षण सोचा और महसूस किया ये भयंकर गर्जन वो भी उत्पन्न कर सकता है । ये ताकत तो उसमे भी है । उसकी गर्भी सारे हृदयाधारियों में भय उत्पन्न कर सकती है उसने अभी तक अपनी इस ताकत को पहचाना क्यों नहीं ? आजतक तो उसने येही सोचा था की वो भेड़ की तरह मिमिया सकता है पर आज उसे लगा की वो कुछ और हिया बहुत अलग ,बहुत अलग शायद ताकत का एक जखीरा उसका समूह तो कहीं और है और ये गर्जना यथार्थ में पुकार थी उसके लिए । बस यही सोचकर वो उठा , और चल दिया । क्षण भर पलट कर अपनी भेद माता को अश्रु पूरित नेत्रों से देखने के बाद वो बस चल दिया कभी वापस न आने के लिए एक महाशक्ति की और जो बरसों से उसके भीतर थी पर इसका पता उसे तब चला जब किसी ने गर्जना कर उसे ललकारा ।
इस तरह एक सिंह भेड़ों के समूह से निकल कर राजा बन गया ।
हमने ये कहानी इसलिए नहीं कही क्योंकि हमें कहानी कहना पसंद है या आप इसे सुनकर प्रसन्न होंगे हमने ये कहानी कही क्योंकि ये आवाहन है हम सभी भेड़ के समूह में रहने वालों शेरो के लिए आइये हम प्रयत्न करें सुनाने के लिए उस गर्जना को जो हममे छुपा नरसिंह जगाएगी वो हम कहीं और से नहीं अपने ही अन्दर से सुनेंगे ।
(ये कहानी और ये पूरा लेख प्रेरित है महान लेखक स्वेट मार्टिन की जो चाहें सो कैसे पाएं किताब से)

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