लोग कहते थे मैं बोलता नहीं
मेरे लफ़्ज़ों से हुइ तकलीफ़ तुम्हें सो कैसे..
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गुरुवार, 26 जून 2014
Bas aise hi..
कभी महसूस किया है अफसाेस कि किसी कागज़ पर बैठा एक छाेटा सा कीड़ा जाे बस अंगुली लग जाने से एक लकीर में तब्दील हाे गया ..
ऐसा क्याें हाेता है?
क्याेंकि वाे बहुत छाेटा हाेता है न ..इतना छाेटा कि हमारी आँखें उसे देख भी नहीं पातीं..आैर सिर्फ छाेटा हाेना उसकि जान ले बैठता है..
खैर जाने दीजिए ...यहां सभी अपना अपना भाग्य जीते और मरते हैं,हम एक अलहदा बात पर विचार करते हैं,
जानते हैं से.मी. क्या है? जी हां लंबाई मापने की इकाई.
१ से.मी. यानि -----------हां लगभग इतना ही बड़ा शायद..
१मीटर=१०० से.मी.
१कि.मी.=१००० मी.
१०० किमी=१०००००मी.
और एक प्रकाशवर्ष?
रुकिए रुकिए ये गणित साधारण हाेते हुए भी उतना साधारण नहीं..
प्रकाशवर्ष यानि lightyear ये भी लंबाई नापने की इकाई जिससे ब्रम्हांड की दूरियां नापी जाती हैं..
१प्रकाशवर्ष = 9.4605284 ×10^12 कि.मी.
= 9.4605284 ×1000000000000 किमी
= 9.4605284 × 1000000000000000 मी.
और जानते हैं हमारे ब्रम्हांड का व्यास यानि diameter कितना है?
10^8 प्रकाशवर्ष
यानि 100000000 प्रकाशवर्ष
= 9.4605284 × 10000000000000000000000000 सेमी
और अब तनिक विचार कीजिए मनुष्य पर
जिसकी औसत ऊंचाई 125 सेमी और औसत चौड़ाई 50 सेमी.....
बस ..
ज़रा इसकी तुलना ऊपर ब्रम्हांड के व्यास से करिए और सोचिए ..
कहीं हमारी औकात उस लकीर बन जाने वाले कीड़े से भी कम तो नहीं?