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शनिवार, 2 जनवरी 2010

जब मैं जन्मा, मेरे संग जन्मी कला.
मेरी साथी कला,
मुझे लुभाती कला,
जब मैं रोता, मेरे संग रोती कला.
जब मैं हँसता,
मेरे संग हंसती कला.
चमचमाती कला,
जगमगाती कला,
कल्पना का वो मोटी सी आँखों में अंजन .
भावों और चित्रों का गहनो में कंचन .
रचना की पूर्णता के सुन्दर से पाओं में,
रागों की पायल की रुनझुन .
लेकर वो चलती,
गिरती संभालती,
रुक रुक मचलती,
राह में ठहर इठलाती कला
बस यूँही, चाह तक पहुँच जाती कला
मेरी साथी कला

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